KGBV के कार्य एवं उद्देश्य / केजीबीवी योजना / कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना

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केजीबीवी योजना / KGBV के कार्य एवं उद्देश्य / कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना

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कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना / Kasturaba Gandhi Girls School Plan / KGBV

भारत सरकार द्वारा सन् 2004 में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की बालिकाओं के लिये सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना के लिये कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना का शुभारम्भ किया गया था।

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इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्ग की छात्राओं को अध्ययन के लिये प्रवेश दिया जाता है। यह विद्यालय विकास खण्डों में स्थापित किये गये हैं जो शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं तथा दुर्गम स्थानों से सम्बन्धित हैं। कस्तूरबा गाँधी विद्यालयों का स्वरूप पूर्णत: आवासीय है। इनमें अध्ययन करने वाली छात्राओं को कक्षा छ: से आठ तक तक शिक्षा प्रदान की जाती है जो छात्राएँ समाज के दलित एवं पिछड़े वर्ग से सम्बन्धित हैं तथा किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गयी हैं। उन समस्त छात्राओं को इन विद्यालयों में प्रवेश कराकर उन्हें पूर्ण साक्षर बनाया जाता है।

वर्तमान समय में 750 करतूरबा गाँधी बालिका विद्यालय कार्य कर रहे हैं। इनके कार्यों के सन्तोषजनक परिणाम भी आ रहे हैं। इन विद्यालयों में कम से कम 75% सीटें अनुसूचित जाति एवं जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्गों की बालिकाओं के लिये आरक्षित होंगी बाकी 25% गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार की बालिकाओं के लिये होंगी।

kGBV या कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना की शुरूआत प्रथम दो वर्ष तक एक अलग योजना के रूप में सर्व शिक्षा अभियान, बालिकाओं के लिये प्राथमिक स्तर पर शिक्षा दिलाने का राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं महिला समाख्या योजना के साथ सामंजस्य बिठाते हुए शुरू की गयी थी लेकिन 1 अप्रैल, 2007 से इसे सर्व शिक्षा अभियान में एक अलग घटक के रूप में विलय कर दिया गया।

कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों के उद्देश्य (Aims of Kasturba Gandhi Girls School)

कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों के प्रमुख उद्देश्यों को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है-

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(1) कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों का उद्देश्य दुर्गम एवं पिछड़े क्षेत्र में बालिका शिक्षा के प्रति जागरुकता उत्पन्न करना है, जिससे सभी अभिभावक बालिकाओं की शिक्षा पर ध्यान दें।

(2) गरीब एवं पिछड़े वर्ग की बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना है, जिससे गरीबी उनके लिये अभिशाप एवं अध्ययन की बाधा न बने।

(3) विद्यालय के आवासीय स्वरूप का उद्देश्य बालिकाओं को प्रतिदिन विद्यालय आने-जाने से मुक्ति प्रदान करना तथा आर्थिक कठिनाइयों से मुक्त करना है; जैसे-भोजन, किताबें तथा पेन्सिल आदि पर किये गये व्यय से मुक्त करना।

(4) जिस क्षेत्र में महिलाओं की साक्षरता दर अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है उस क्षेत्र की बालिकाओं को पूर्ण साक्षर बनाना जिससे उस क्षेत्र की साक्षरता दर को अन्य क्षेत्रों के समान स्तर पर पहुँचाया जाय।

(5) जिन क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों का अभाव है तथा शिक्षा के साधन उपलब्ध नहीं हैं उस क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षित करना कस्तूरबा गाँधी विद्यालयों का प्रमुख उद्देश्य है।


उपरोक्त विवेचन से यह स्पष्ट होता है कि कस्तूरबा गाँधी छात्रा विद्यालय सर्व शिक्षा अभियान एवं सम्पूर्ण साक्षरता अभियान की कड़ी के रूप में हैं, जो विशेष रूप से दुर्गम एवं पिछड़े क्षेत्र की छात्राओं को शिक्षित करने के लिये स्थापित किये गये हैं। इस प्रकार के विद्यालयों में छात्राएँ पूर्ण रूप से शैक्षिक वातावरण के अन्तर्गत निःशुल्क रूप से शिक्षा प्राप्त करती हैं। इससे छात्रा शिक्षा के प्रति समाज में जागरुकता उत्पन्न होती है।



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