शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है / Downward Filtration Theory in Education in hindi

बीटीसी एवं सुपरटेट की परीक्षा में शामिल शिक्षण कौशल के विषय प्रारंभिक शिक्षा के नवीन प्रयास में सम्मिलित चैप्टर शिक्षा के शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है / Downward Filtration Theory in Education in hindi आज हमारी वेबसाइट hindiamrit.com का टॉपिक हैं।

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Downward Filtration Theory in Education in hindi / शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है

शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है / Downward Filtration Theory in Education in hindi
शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है / Downward Filtration Theory in Education in hindi

शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त क्या है या छनाई सिद्धांत

‘निस्यन्दन’ (Filtration) से तात्पर्य है-‘छानना या निथारना’। अंग्रेजों ने शिक्षा के प्रसार को सरल एवं सुविधायुक्त बनाने की दृष्टि से इसे तात्कालिक शिक्षा नीति में सिद्धान्ततः स्वीकार कर लिया गया। इस सिद्धान्त से उनका तात्पर्य था-“जन समूह में शिक्षा ऊपर के प्रभावी वर्ग के शिक्षित लोगों से छन-छन कर नीचे पहुँचनी चाहिये।

इस प्रकार शिक्षा का प्रवाह बूंद-बूंद करके भारतीय जीवन के हिमालय से प्रारम्भ हो, जिससे वह कुछ काल के उपरान्त एक अजस्र चौड़ी एवं विशाल धारा में परिवर्तित होकर शुष्क रेगिस्तान की सिंचाई कर सके।”

तत्कालीन बम्बई के गवर्नर जनरल वार्डन (Warden) को काउन्सिल के सदस्य ने इस सिद्धान्त की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा था-“जन सामान्य को अप शिक्षा देने से तो उत्तम है, उच्च वर्ग के प्रभावी व्यक्तियों के छोटे समूह को अधिक उच्च शिक्षा प्रदान करना।”

ईस्ट इण्डिया कम्पनी के मालिकों ने भी 1830 के आदेश-पत्र में अपनी इस भावना को प्रकट करते हुए लिखा था-“शिक्षा की प्रगति की सम्भावना तभी व्यक्त की जा सकती है, जबकि उच्च वर्गों के उन व्यक्तियों को शिक्षा प्रदान की जाय, जो पर्याप्त समय निकाल सकते हैं तथा वे अपने ही जनसमुदाय में प्रभावशाली व्यक्ति भी हैं।”

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अन्त में लॉर्ड ऑकलैण्ड ने इस सिद्धान्त की महत्ता को स्वीकारते हुए इसे तात्कालिक शिक्षा नीति का अभिन्न अंग बना दिया। ऑकलैण्ड ने लिखा था-“सरकार को समाज के उच्च वर्ग को ही शिक्षा प्रदान करनी चाहिये, जिससे सभ्यता छन-छन कर जनता तक पहुँचे।”

इस सिद्धान्त को सरकारी नीति के रूप में सबसे अधिक सरकारी अधिकारियों द्वारा सराहा गया। सन् 1844 में लार्ड हार्डिग (Lord Hardinge) ने ऐसे सभी अंग्रेजी पढ़े-लिखे व्यक्तियों को सरकारी नौकरी में भर्ती करने की घोषणा कर दी। इस प्रकार भारतीयों के लिए शिक्षा सरकारी नौकरी प्राप्त करने का साधन तथा अंग्रेजों के साथ काम करने के रूप में गर्व का विषय बन गयी।


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