संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi

दोस्तों विज्ञान की श्रृंखला में आज हमारी वेबसाइट hindiamrit.com का टॉपिक संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi है। हम आशा करते हैं कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपकी इस टॉपिक से जुड़ी सभी समस्याएं खत्म हो जाएगी ।

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संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi

संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi
संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi

संघ-कॉर्डेटा Phylum – Chordata

(Chord-रस्सी; ata-धारण करना। पृष्ठरज्जु अथवा नोटोकॉर्ड धारक जन्तु) संघ-कॉडेंटा की स्थापना बैल्फोर (Balfour) नामक वैज्ञानिक ने सन् 1880 में की थी। इस संघ के जन्तु बहुत विकसित होते हैं। इसमें लगभग 550002 जीवित एवं 25000 विलुप्त जातियाँ आती है। इन जन्तुओं में जीवन की किसी न किसी अवस्था में निम्न तीन लक्षण अवश्य ही पाए जाते हैं।

कॉर्डेटा संघ के तीन प्रमुख लक्षण

(i) पृष्ठरज्जु या नोटोकॉर्ड (Notochord) यह शरीर की मध्य पृष्ठ रेखा में फैली, ठोस, लम्बी, लचीली छड़नुमा रचना है, जो तन्त्रिका रज्जु (Nerve cord) तथा आहारनाल (Alimentary canal) के बीच पाई जाती है। वयस्क उच्च जीवों में इसके स्थान पर कशेरुकदण्ड (Vertebral column) बन जाता है।

(ii) पृष्ठीय नाल तन्त्रिका रज्जु (Dorsal Tubular Nerve Cord) यह  जन्तुओं में केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र बनाती हैं तथा पृष्ठरज्जु या नोटोकॉर्ड के ऊपर स्थित होती है। मनुष्य में इसका अगला सिरा मस्तिष्क (Brain) और शेष भाग मेरुरज्जु या रीढरज्जु (Spinal cord) बनता है। अन्य अकशेरुकी जन्तुओं (जैसे-केंचुआ, कॉकरोच, आदि) में यह ठोस होती है तथा अधर तल (Ventral surface) पर पाई जाती है।

(iii) ग्रसनी क्लोम दरारें (Pharyngeal Gill Clefts) जीवन की किसी न किसी अवस्था में ग्रसनी की दीवार में जोड़ीदार एवं पाश्र्वीय क्लोम दरारें (Gills slits) अवश्य पाई जाती हैं, जलीय कॉडेंट्स में ये रचनाएँ जीवन पर्यन्त बनी रहती हैं और श्वसन में भाग लेती है, जबकि स्थलीय कॉर्डेट्स में श्वसन का कार्य फेफड़ों द्वारा होने के कारण ये जबड़े और उसके आस-पास की संरचनाओं में रूपान्तरित हो जाती हैं। उपरोक्त तीन लक्षण संघ-कॉर्डेटा के मूलभूत लक्षण हैं। इस संघ के प्राणियों में पाए जाने वाले अन्य लक्षण निम्न हैं।

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कार्डेटा संघ के सामान्य लक्षण General Characteristics of chordata in hindi

(i) इस संघ के जन्तुओं में द्विपाश्र्वीय सममित, त्रिस्तरीय शरीर एवं वास्तविक देहगुहा (Enterocoel) पाई जाती है, जिसमें अंगतन्त्र स्तर का संगठन पाया जाता है।

(ii) इनमें परिवहन तन्त्र पूर्ण विकसित एवं बन्द प्रकार का होता है। रुधिर में हीमोग्लोबिन नामक श्वसन रंगा पाई जाती है।

(iii) इनमें पूर्ण विकसित तन्त्रिका तन्त्र, उत्सर्जी तन्त्र एवं प्रजनन तन्त्र पाया जाता है।

(iv) अन्तःस्रावी तन्त्र (Endocrine system) भी अत्यन्त विकसित होता है।

(v) जन्तु एकलिंगी (Unisexual) होते हैं। निषेचन एवं परिवर्धन बाह्य या आन्तरिक होता है। इसी आधार पर ये जन्तु, अण्डयुज अथवा जरायुज होते हैं।

संघ-कॉर्डेटा का वर्गीकरण Classification of Phylum Chordata in hindi

संघ-कॉडेंटा के वर्गीकरण को निम्न आरेख द्वारा समझा जा सकता है।

संघ कार्डेटा एवं इसका वर्गीकरण : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of chordata phylum in hindi
संघ कार्डेटा का वर्गीकरण

उपसंघ-ट्यूनीकेटा या यूरोकॉर्डेटा Sub-Phylum-Urochordata

ट्यूनीकेटा या यूरोकॉर्डेटा उपसंघ के सामान्य लक्षण

(i) ये कोमल शरीर वाले जन्तु अपने विशेष बाह्यावरण के कारण पहचाने जाते हैं, जिसे यूनिक (Tunic) कहते हैं इसलिए इन्हें ट्यूनिकेट्स भी कहा जाता है।

(ii) इनमें पृष्ठरज्जु अथवा नोटोकॉर्ड जीव की पूँछ तक ही सीमित रहती है। इसी कारण ये यूरोकॉडेंट्स कहलाते हैं।

(iii) इनमें ग्रसनीय गिल छिद्र पाए जाते हैं।

(iv) इनम U-आकार की आहारनाल होती है।

(v) इन जीवों में संघ-कॉडेंटा के लक्षण लार्वा में पूर्णरूप से पाए जाते हैं तथा यह लार्वा पानी में मुक्त रूप से विचरण करता है, जबकि वयस्क में धँसा रहता है। अतः इन जीवों में अद्योगामी रूपान्तरण (Retrogressive metamorphosis) पाया जाता है; उदाहरण- हर्डमानिया, सियोना, साल्पा, आदि।

ट्यूनीकेटा या यूरोकॉर्डेटा उपसंघ के मुख्य सदस्य / ट्यूनीकेटा या यूरोकॉर्डेटा उपसंघ के मुख्य जीव

हर्डमानिया Herdmania

इसका शरीर थैलीनुमा होता  है। इसका आधारीय पाद रेत में धँसा होता है। इसके शरीर के  अग्रभाग में एट्रियल और ब्रेकियल साइफन पाए जाते हैं। इसकी देहभित्ति को मेन्टल कहते हैं। इनमें पृष्ठरज्जु पूँछ तक ही सीमित होती है।

उपसंघ-सिफैलोकॉर्डेटा
Sub-Phylum-Cephalochordata

सिफैलोकॉर्डेटा उपसंघ के सामान्य लक्षण

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(i) इनका शरीर मछली के समान होता है।
(ii) इसमें पृष्ठरज्जु सम्पूर्ण शरीर में एक सिरे से दूसरे सिरे तक फैले है।
(iii) इसमें हृदय अनुपस्थित होता है।
(iv) इनमें रुधिर परिसंचरण तन्त्र बन्द प्रकार का होता है;
उदाहरण- एम्फिऑक्सस (Amphioxus)

सिफैलोकॉर्डेटा उपसंघ के मुख्य सदस्य / सिफैलोकॉर्डेटा उपसंघ के मुख्य जीव

एम्फिऑक्सस Amphioxus

यह लगभग 8 सेमी लम्बा बेलनाकार जन्तु है, जो समुद्र के तल पर बिल बनाकर रहता है। इसमें मुख के चारों ओर मुख छिद्र (Oral hood) होता है,मुख सिराई का चक्र उपस्थित होता है। ग्रसनी में क्लोम छिद्र पाए जाते हैं।

उपसंघ-क्रैनिऐटा या वर्टीब्रेटा
Sub-phylum-Craniata or Vertebrata

क्रैनिऐटा या वर्टीब्रेटा उपसंघ के सामान्य लक्षण

(i) ये उच्च कशेरुक होते हैं। इस उपसंघ के जन्तुओं में कशेरुकदण्ड तथा अन्तःकंकाल पाया जाता है, जो पेशियों को चलन हेतु सहारा देता है।

(ii) ये द्विपाश्र्वीय सममित, त्रिस्तरीय, सीलोम युक्त एवं खण्डयुक्त शरीर रखते हैं।

(iii) इनका शरीर मुख्यतया चार भागों में बँटा होता है; जैसे-सिर, गर्दन, धड़ एवं पूँछ।

(iv) इनमें मस्तिष्क उपास्थि या अस्थि से बने एक मस्तिष्क खोल या कपाल (Cranium) में स्थित रहता है।

(v) इनमें ग्रसनीय क्लोम दरारें निम्न प्राणियों में जीवन पर्यन्त एवं उच्च प्राणियों में सिर्फ भ्रूण या लार्वा अवस्था में पाई जाती है।

(vi) इनके शरीर पर दो जोड़े उपांग पाए जाते हैं, जो पखने (Fins) के रूप में हो सकते हैं या फिर पादों (Legs) के रूप में।

(vii) इनमें पूर्ण विकसित जैविक तन्त्र पाए जाते हैं, जैसे-पाचन, तन्त्रिका, उत्सर्जी, परिवहन एवं प्रजनन तन्त्र ।

उपसंघ-क्रेनिएटा अथवा वर्टीब्रेटा को निम्नलिखित दो समूहों में वर्गीकृत किया गया है।

प्रभाग-एग्नैथा Agnatha
(i) ये सबसे निम्न कोटि के कशेरुकी जन्तु हैं।
(ii) इन जन्तुओं में पृष्ठरज्जु जीवन पर्यन्त पाई जाती हैं।
(iii) इनमें वास्तविक जबड़े अनुपस्थित होते हैं।
(iv) इनमें जोड़ीदार उपांग नहीं पाए जाते हैं;

इन्हें दो वर्गों में विभाजित किया गया है।

(a) वर्ग-ऑस्ट्रैकोडर्मी (Ostrachodermi) इस वर्ग के जन्तुओं
(मछलियों) को प्रथम कशेरुकी माना जाता है। ये विलुप्त हो चुकी हैं;
उदाहरण- सिफैलेप्सिस

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(b) वर्ग-साइक्लोस्टोमेटा (Cyclostomata) इनका शरीर लम्बा एवं नलाकार होता है तथा पूँछ चपटी होती है। त्वचा कोमल तथा चिकनी एवं शल्करहित होती है। वयस्क अवस्था में पृष्ठरज्जु पाया जाता है तथा पख जोड़ों में नहीं होते।
जबड़ा अनुपस्थित एवं गोल मुख चूषक से घिरा रहता है, जो इनको दूसरे  जन्तुओं के शरीर से जुड़ने में सहायता करता है। इनमें श्वसन 5-16 जोड़े क्लोमों द्वारा होता है, जोकि सिर के पृष्ठ (Dorsal) भाग में एक नासाद्वार बनाते हैं। ये जन्तु एकलिंगी होते हैं तथा इनमें निषेचन बाह्य जल में होता है; उदाहरण-लैम्प्रेज (Lamprays) जैसे- पैट्रोमाइजॉन (Petromy2on) एवं हैग मछलियाँ (Hag fishes); जैसे-मिक्सीन (Myxine)।

क्रैनिऐटा या वर्टीब्रेटा उपसंघ के मुख्य सदस्य / क्रैनिऐटा या वर्टीब्रेटा उपसंघ के मुख्य जीव

पैट्रोमाइजॉन एवं मिक्सीन

इनका शरीर ईल के समान, शरीर पर शल्क, जबड़ों एवं पार्श्व पखों का अभाव होता है। मुख गोलाकार एवं चूषक होता है। क्लोम के 5 से 16 जोड़े पाए जाते हैं। ये परजीवी एवं अपमार्जक होते हैं।

प्रभाग-नैथोस्टोमेटा Gnathostomata
(i) इनमें पूर्ण विकसित वास्तविक जबड़े पाए जाते हैं।
(ii) इनमें उपांग, पखों और पादों के रूप में पाए जाते हैं।
(iii) इनमें पृष्ठरज्जु पूर्ण विकसित होती है।
इस समूह को निम्नलिखित दो अधिवर्गों में बाँटा गया है।
(a) मत्स्य (Pisces)
(b) टेट्रापोडा (Tetrapoda)

                        ◆◆◆ निवेदन ◆◆◆

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