संघ सीलेन्ट्रेटा या निडेरिया : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of coelenterata or cnidaria phylum in hindi

दोस्तों विज्ञान की श्रृंखला में आज हमारी वेबसाइट hindiamrit.com का टॉपिक संघ सीलेन्ट्रेटा या निडेरिया : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of coelenterata or cnidaria phylum in hindi है। हम आशा करते हैं कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपकी इस टॉपिक से जुड़ी सभी समस्याएं खत्म हो जाएगी ।

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संघ सीलेन्ट्रेटा या निडेरिया : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु

संघ सीलेन्ट्रेटा या निडेरिया : सामान्य लक्षण एवं इसके प्रमुख जंतु / information of coelenterata or cnidaria phylum in hindi
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संघ – निडेरिया या सीलेन्ट्रेटा
Phylum Cnidaria or Coelenterata (Knide दंश कोशिका; coel-खोखला; enteron-आन्त्र)

इसका पुराना नाम सीलेन्ट्रेटा (Coelenterata) है। निडेरिया नाम इनका दंश कोशिकाओं की उपस्थिति के कारण पड़ा है। अरस्तू (Aristotle) ने इन्हें निडी (Cnidae) कहा था। ल्यूकर्ट (Leuckart) ने स्पंजों को सम्मिलित करके सीलेन्ट्रेटा संघ बनाया, जबकि हैचेक (Hatschek; 1888) ने निडेरिया संघ को पोरीफेरा व टीनोफोर से पृथक् किया।

निडेरिया या सीलेन्ट्रेटा संघ के सामान्य लक्षण

(i) ये एकल या निवही जीव हैं; जो प्राय: समुद्र तथा जलाशयों में ही पाए जाते हैं।

(ii) इनका शरीर द्विस्तरीय (Diploblastic) देहभित्ति युक्त एवं अरीय सममित (Radial symmetry ) वाला होता है। शरीर के दोनों स्तरों के बीच मीसोग्लीआ (Mesogloea) उपस्थित होता है।

(iii) ये जन्तु बहुरूपी (Polymorphic) होते हैं तथा इनमें पीढ़ी एकान्तरण (Alternation of generation) पाया जाता है।

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(iv) इनका शरीर ऊतक स्तर (Tissue grade) के संगठन से निर्मित होता है।

(v) इनके शरीर पर दंश कोशिकाएँ (Nematoblast or sting cells) पाई जाती हैं, जो गमन, सुरक्षा व पोषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

(vi) इनके शरीर के मध्य में जठरवाहिनी गुहा या सीलेन्ट्रॉन (Coelenteron) पाई जाती हैं, जिसमें भोजन का पाचन व वितरण दोनों होते हैं।

(vii) इनके शरीर में एक ही छिद्र होता है, जो मुख एवं मलद्वार दोनों का कार्य करता है।

(viii) इनमें श्वसन, उत्सर्जन, संवहन तन्त्र अनुपस्थित व तन्त्रिका तन्त्र अल्प विकसित होता है।

(ix) इनमें पुनरुद्भवन की अपार क्षमता पाई जाती है। यह इनके मीसोग्लीआ में उपस्थित अन्तराली कोशिकाओं (Interstitial cells) के कारण होता है।

(x) अधिकतर सदस्यों में दो अवस्थाएँ पाई जाती प्रथम अवस्था जीवनकाल की स्थानबद्ध अवस्था या पॉलिप (Polyp) कहलाती है, जिसमें शरीर प्राय: बेलनाकार होता है तथा जो अलैंगिक जनन करती है। दूसरी अवस्था जीवनकाल की स्वतन्त्र अवस्था या मेड्डुसा (Medusa) कहलाती है, दूसरी अवस्था जिसमें शरीर छातानुमा या तश्तरीनुमा होता है तथा यह लैंगिक जनन का पर्याय है।

(xi) इनमें लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रकार का जनन होता है। अलैंगिक जनन मुख्यतया मुकुलन द्वारा होता है; उदाहरण-सी-ऐनीमॉन, मैड्रीपोरा, हाइड्रा, जेलीफिश, ओबीलिया, फाइसेलिया, पेनेटुला, आदि।

निडेरिया या सीलेन्ट्रेटा संघ के मुख्य सदस्य / निडेरिया या सीलेन्ट्रेटा संघ के मुख्य जीव

हाइड्रा Hydra

यह एकल, गमनशील व पॉलिप पीढ़ी का जीव स्वच्छ जल में पाया जाता है। इसका शरीर द्विस्तरीय होता है। मुख के चारों ओर 6-10 स्पर्शक पाए जाते हैं।।यह अत्यन्त संवेदनशील जीव है। शरीर कोमल व बेलनाकार होता है। दंश कोशिकाएँ स्पर्शकों पर ही पाई जाती हैं। यह द्विलिंगी होता है तथा इसमें अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है। हाइड्रा में पुनरुद्भवन की आपार क्षमता होती है।

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फाइसेलिया Physalia

यह एक स्वतन्त्रजीवी, निवही (Colonial) व बहुरूपी (Polymorphic) जीव है, जो समुद्र में पाया जाता है। इसे पुर्तगाली नौसैनिक भी कहते हैं। यह मुख्यतया मेडुसा पीढ़ी का जीव है, जिसमें बाकी प्रावस्थाएँ सम्बद्ध रूप से दिखाई देती हैं। यह छातानुमा, अर्द्धपारदर्शी, वायुकोष व लम्बे स्र्पशकों से युक्त होता है। फाइसेलिया अपने स्पर्शकों को सिकोड़कर 10 सेमी व फैलाकार 10 मी तक कर सकता है। इसके ऊपर पालनुमा, गुम्बदाकार उभार या क्रस्ट (Crest) पाया जाता है। दंश कोशिकाएँ स्पर्शकों पर स्थित होती हैं। फाइसेलिया की आन्तरिक भित्ति पर स्थित गैस ग्रन्थियाँ गैस का स्रावण या अवशोषण कर इसे ऊपर या नीचे ले जाती है। वायुकोष के नीचे जीवकों से समूह लटके रहते हैं, जिसे कॉरमीडियम (Cormidium) कहते हैं। इसके प्रत्येक जीवक को एक जन्तु के समकक्ष मानते हैं।  निडेरिया के कुछ जन्तुः (a) मेट्रीडियम ( एनीमोन) (b) ऑरेलिया (जेलीफिश) (c) पेनेटुला (समुद्री पंख)


                             ◆◆◆ निवेदन ◆◆◆

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