कम्प्यूटर के उपयोग एवं अनुप्रयोग / कम्प्यूटर से लाभ और हानि

आज का युग कम्प्यूटर का युग है। आज के जीवन मे सभी को कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी होनी चाहिए। बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी कम्प्यूटर से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसीलिए हमारी साइट hindiamrit.com कम्प्यूटर से जुड़ी समस्त महत्वपूर्ण टॉपिक की श्रृंखला पेश करती है,जो आपके लिए अति महत्वपूर्ण साबित होगी,ऐसी हमारी आशा है। अतः आज का हमारा टॉपिक कम्प्यूटर के उपयोग एवं अनुप्रयोग / कम्प्यूटर से लाभ और हानि की जानकारी प्रदान करना है।

कम्प्यूटर के उपयोग एवं अनुप्रयोग / कम्प्यूटर से लाभ और हानि

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कम्प्यूटर के उपयोग एवं अनुप्रयोग (Uses and Application of Computer)

जीवन के क्षेत्र में किसी-न-किसी रूप में कम्प्यूटर का उपयोग एवं अनुप्रयोग निम्नलिखित है-

1. व्यापारिक क्षेत्र में

व्यापार तथा व्यवसाय के क्षेत्र में आजकल कम्प्यूटरों का उपयोग किया जा रहा है। व्यावसायिक संस्थाओं में आँकड़ों से प्राप्त सूचनाओं के माध्यम से उचित नियन्त्रण व उत्कृष्ट प्रबन्धन के लिए सटीक निर्णय लेने में कम्प्यूटर की सहायता प्राप्त की जाती है। व्यापार के क्षेत्र में कम्प्यूटरों का उपयोग सन् 1954 से ही शुरू हो गया था। आज अनेक सॉफ्टवेयर व्यवसाय, व्यापार, एकाउण्ट्स आदि के क्षेत्र के लिए उपलब्ध हैं। इनके उपयोग से कार्यालय प्रबन्धन में सरलता आयी है। अनेक प्रकार की व्यावसायिक सूचनाएँ मात्र कुछ ही बटन दबाने से प्राप्त की जा सकती हैं। वेतनों का निर्धारण, वेतन बिल बनाना, उनका सभी प्रकार का हिसाब रखना बहुत सुगम हो गया है। व्यापार का उत्पादन,व्यय, लाभ आदि सरलता से कम्प्यूटर की सहायता से किये जा सकते हैं।

2. बैंकिंग क्षेत्र में

कम्प्यूटर का प्रयोग बैंकों में लेन-देन की गणना व भण्डारण के लिए होता है। कम्प्यूटर द्वारा ही बैंकों में चैकों का भुगतान किया जाता है। ए. टी. एम. अर्थात् ऑटोमेटेड टेलर मशीन (A.T.M.), क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड व स्मार्ट कार्ड इत्यादि सभी कम्प्यूटर व कम्प्यूटर तकनीकी के अन्तर्गत प्रयुक्त होते हैं। एक बटन दबाते ही किसी ग्राहक के खाते का विवरण पता चल जाता है। बैंकों के अन्य खातों का रख-रखाव भी अधिक सुविधाजनक हो गया है। शेयर के भावों का उतार-चढ़ाव हस्तान्तरण,नामांकन आदि से सम्बन्धित सूचनाएँ आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

3.शिक्षा के क्षेत्र में

कम्प्यूटर द्वारा आज अनेक विद्यालयों व विश्वविद्यालयों में
शिक्षार्थियों को पढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। सर्वप्रथम स्किनर ने शिक्षण यंत्र बनाया और इसके लिए रेखीय अभिक्रमित अध्ययन हेतु प्रोग्राम बनाये। आज के कम्प्यूटर स्किनर के शिक्षण यन्त्र के ही समुन्नत, परिमार्जित तथा परिष्कृत उपकरण हैं जिनके शिक्षा तथा शिक्षण के क्षेत्र में विविध तथा व्यापक रूप में प्रयोग हो सकते हैं। आज कम्प्यूटर ने शिक्षण को अत्यधिक प्रभावशाली बनाया है। शिक्षण के क्षेत्र में कम्प्यूटर सहायक अनुदेशन तथा कम्प्यूटर-प्रबन्धकीय अनुदेशन का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है।

4. खेल एवं मनोरंजन के क्षेत्र में

कम्प्यूटर का उपयोग अनेक प्रकार के खेल खेलने में भी किया जाता है, लूडो, शतरंज, टेनिस, क्रिकेट, कार रेस, मोटर साइकिल रेस आदि प्रचलित खेल हैं। कम्प्यूटर हमारे मनोरंजन का भी साधन है। मल्टीमीडिया तथा स्पीकर्स की व्यवस्था करके हम संगीत सुन सकते हैं। सी. डी. लगाकर कोई भी फिल्म देख सकते हैं और अपना मनोरंजन कर सकते हैं।

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5. इण्टरनेट व इन्ट्रानेट

इण्टरनेट व इन्ट्रानेट भी कम्प्यूटर तकनीकी की देन है। इनके द्वारा विभिन्न व्यापारिक संस्थाएँ देश-विदेश में अपना व्यापार कर रही हैं, अपना उत्पाद बेच रही हैं व इण्टरनेट के द्वारा ही धन का आदान-प्रदान सुगमता से कर रही हैं।

6. शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में

शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में भी कम्प्यूटर के विविध उपयोग हैं। कार्यों की सूची बनाना, उनके सम्बन्ध में विविध सूचनाएँ रखना, शिक्षकों के सम्बन्ध में सूचनाएँ रखना, परीक्षा परिणाम बनाना, उनकी व्याख्या करना, परीक्षण सुधार कार्यक्रमों की समीक्षा करना, प्रश्न-पत्र निर्माण तथा उनका मुद्रण करना, छात्र तथा अध्यापकों की उपस्थिति तथा उनके द्वारा लिए गये अवकाशों का विवरण रखना, सतत् तथा व्यापक मूल्यांकन की व्यवस्था तथा उनसे सम्बन्धित आँकड़ों का मैमोरी में भण्डारण करना, प्रश्न-पत्रों की कठिनाई स्तर तक की समीक्षा करना आदि कार्य कम्प्यूटर सहज ही कर देता है।

7. परीक्षाएँ

विभिन्न प्रकार की परीक्षाएँ भी अब कम्प्यूटर पर ही सम्पादित होती हैं तथा जहाँ परीक्षार्थी उत्तर-पुस्तिकाओं का प्रयोग करते हैं। वहाँ उत्तर-पुस्तिकाओं की जाँच भी कम्प्यूटर द्वारा करायी जाती है तथा परीक्षाफल तैयार करने में भी कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है।

8. मेडिकल विज्ञान में

स्वास्थ्य तथा चिकित्सा विज्ञान के लिए कम्प्यूटर बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रहा है। कम्प्यूटर का उपयोग औषधि निर्माण से लेकर उपचार तक की सम्पूर्ण क्रिया में हो रहा है। औषधि निर्माण के लिए औषधि के विभिन्न अवयवों की जाँच करना, मात्रा निर्धारित करना, प्राणियों पर उस औषधि के प्रभावों को अंकित करना, औषधि की सफलता तथा उपयोगिता के सम्बन्ध में भविष्यवाणी करना आदि सभी कम्प्यूटर के द्वारा किया जाता है। रोगों के निदान तथा उपचार में भी कम्प्यूटर बड़े उपयोगी सिद्ध हुए हैं। कम्प्यूटराइज्ड उपकरणों की सहायता से मानव के शरीर के अंदर के हर हिस्से की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। लीवर, किडनी, हृदय आदि के कार्य करने की जानकारी सही ढंग से ज्ञात की जाती है।

9. इंजीनियरिंग क्षेत्र में

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कम्प्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार की सरल तथा जटिल मशीनों, छोटे-छोटे यंत्रों तथा उपकरणों की उपयोगी तथा सरल व सस्ती डिजाइन, कम्प्यूटर हमें सहज ही उपलब्ध करा देते हैं। कम्प्यूटर भवन, पुल, बाँध, नहर, जहाज, हवाई जहाज, रेल इंजन आदि का डिजायन भी बनाकर देते हैं।

10. संचार व्यवस्था में

डाक विभाग का भी कार्य कम्प्यूटर ने सरल कर दिया है। आज प्रयोगकर्ता अपने घर पर ही बैठे-बैठे ही इण्टरनेट पर ई-मेल द्वारा अपने संदेश अपने सम्बन्धियों को भेज सकते हैं व तुरन्त ही उनका संदेश भी प्राप्त कर सकते हैं। कम्प्यूटर के द्वारा लम्बी दूरी तक समाचारों का सुविधापूर्वक सम्प्रेषण सम्भव है। मॉडम की सहायता से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर को सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है। मॉडल डिजिटल सूचनाएँ प्राप्त कर उन्हें ‘ऑन-लॉग’ में बदलकर टेलीफोन लाइन के माध्यम से दूसरे कम्प्यूटर को भेजता है। दूसरा कम्प्यूटर मॉडम की सहायता से ऑन लॉग रूप में प्राप्त सूचनाओं को डिजिटल में बदल कर कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करता हैं।

11. सेना में प्रयोग

कम्प्यूटरों द्वारा सेना के अभ्यास और युद्धों के दौरान आव्यूहन तथा रणनीति तैयार की जाती है। टैंक, मिसाइल, युद्ध विमानों, पनडुब्बी जैसे संवेदनशील उपकरण आदि के निर्माण में कम्प्यूटरों का उपयोग होता है। शत्रु के ठिकानों, सैन्य-शक्ति तथा शत्रु की मारक क्षमता की सूचना कम्प्यूटर द्वारा उपलब्ध हो जाती है। कम्प्यूटर द्वारा मानव रहित युद्ध विमानों का प्रयोग सम्भव हुआ है। युद्ध प्रणाली में प्रक्षेपास्त्रों के उत्पादन, उनकी सफलता व सटीकता भी आज कम्प्यूटर के कारण ही सम्भव हो सकी है। हाइड्रोजन बम, न्यूक्लियर बम जैसे घातक अस्त्रों का परीक्षण व प्रभाव भी कम्प्यूटर की सहायता से ही किया जाता है।

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12. ई-कॉमर्स तकनीक

ई-कॉमर्स तकनीक का विकास भी कम्प्यूटर द्वारा ही सम्भव हो सका है, जिसमें व्यापार का विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक यन्त्रों व माध्यमों द्वारा दूर-दराज के क्षेत्रों तक किया जा सकता है।

13. फिल्म इण्डस्ट्रीज में फिल्म अधवा चलचित्र बनाने, कार्टून फिल्म व एनिमेशन बनाने में भी कम्प्यूटर के प्रयोग से आसानी हो गयी है।

14. मौसम विज्ञान में

मौसम विज्ञान कम्प्यूटरों को विविध कार्यों हेतु प्रयोग करता है। वायुदाब के क्षेत्रों का पता लगाने, बादलों की स्थिति, गति व दिशा का पता लगाने, वायुदाब तथा बादलों की ऊँचाई, आने वाले समय में आँधी, तूफान, झंझावत आदि का पता लगाने में कम्प्यूटर काफी सहायक सिद्ध हुए हैं।

15. अन्तरिक्ष विज्ञान में

कम्प्यूटरों की सहायता से आज अन्तरिक्ष विज्ञान उच्च शिखर पर है। अन्तरिक्ष में मानव रहित विमान भेजकर उनकी दिशा तथा कार्यों को जमीन की सहत से ही नियन्त्रित करना, उनके संकेत प्राप्त कर संकेतों को डिजीटल में बदलकर आवश्यक रूप से उनका उपयोग करना आदि सब कुछ कम्प्यूटरों की सहायता से सम्भव है। कम्प्यूटर अन्तरिक्ष में उड़ने वाले सेटेलाइट उपकरणों को आवश्यक निर्देश भेजने का सशक्त साधन है। मानव ने चन्द्रमा, मंगल तथा अन्य ग्रहों पर पहुँचने का साहस भी कम्प्यूटरों की सहायता से किया है।

16. वैज्ञानिक क्षेत्र

कम्प्यूटरों के प्रयोग से आज हम अनेक वैज्ञानिक कार्य करने में तथा नये नये वैज्ञानिक आविष्कार करने में सक्षम हुए हैं। अणु-संरचना, रसायनों का विश्लेषण, विज्ञान के लिए उपकरण निर्माण हेतु समान्तर कार्य करना, भू-गभीय अध्ययन करना, खनिजों का विश्लेषण करना, प्लाज्मा अनुसंधान, प्राणी के अवयवों की स्थिति तथा उनके कार्य आदि की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक खोजें, विद्युत परिपथ आदि अनेक ऐसे कार्य हैं जिन्हें कम्प्यूटरों की सहायता से सम्पन्न किया जाता है।

17. यातायात व्यवस्था

कम्प्यूटरों का प्रयोग जल, थल एवं वायु मार्गीय यातायात साधनों की व्यवस्था तथा संचालन के लिए किया जाता है। कम्प्यूटरों द्वारा विभिन्न ट्रेनों की गति, पटरी की संख्या, आने-जाने का समय पता चल जाता है। कम्प्यूटर द्वारा वायुयान की उड़ान, ऊँचाई आदि की संरचना पृथ्वी सतह पर ही प्राप्त हो जाती है। रेल, वायुयान, बसों में टिकट देने, आरक्षण करने तथा आरक्षण की स्थिति बताने, किसी ट्रेन का मार्ग पर पड़ने
वाले स्टेशनों की सूचना देने का काम भी कम्प्यूटर ही करते हैं। घर बैठे ही किसी भी स्टेशन से आरक्षण करा सकते हैं। दूरी तथा किराया भी ज्ञात कर सकते हैं।

18. अनुसन्धान कार्य

अनुसन्धान के हर क्षेत्र में कम्प्यूटरों का प्रयोग किया जा रहा है। भू-गर्भशास्त्र, अर्थशास्त्र, खगोलशास्त्र अथवा किसी भी क्षेत्र में अनुसंधान हो, तथ्यों के विश्लेषण, गणनाओं को करने, निष्कर्ष प्राप्त करने आदि में कम्प्यूटरों का प्रयोग किया जा रहा है।

कम्प्यूटर के लाभ (Advantages of Computer)

कम्प्यूटर उपयोग के मुख्य लाभ निम्नांकित हैं-

(1) इसमें सूचनाओं का संग्रहण, विश्लेषण तथा नवीनीकरण का कार्य अत्यन्त सरलता एवं दक्षता से अल्प समय में किया जा सकता है।
(2) इससे मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में किये जाने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए नवीनतम एवं सत्य सूचनाएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
(3) कम्प्यूटर का प्रयोग प्रारम्भिक शिक्षा से लेकर उच्चतर शिक्षा तक किया जा रहा है।
(4) कम्प्यूटर में संग्रहित सभी सूचनाएँ सुरक्षित रहती हैं।

(5) कम्प्यूटर की सहायता से किसी भी विषय का अध्ययन बार-बार किया जा सकता है, जो कि शिक्षण में एक शिक्षक द्वारा सम्भव नहीं है।
(6) कम्प्यूटर से गहन जानकारियाँ प्राप्त होती हैं जिससे व्यक्ति एवं विद्यार्थी को व्यक्तिगत लाभ होता है।
(7) कम्प्यूटर के प्रयोग से शिक्षा को अनेक आयाम प्राप्त होते हैं।
(8) शिक्षा प्रशासन में कम्प्यूटर की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। विद्यार्थियों की वांछित जानकारियाँ, परीक्षा से सम्बन्धित सभी जानकारियाँ, मूल्यांकन आदि सभी कम्प्यूटर के द्वारा सम्भव हो सका है।
(9) इण्टरनेट का प्रयोग भी लाभदायक सिद्ध हुआ है।

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कम्प्यूटर की सीमाएँ / कंप्यूटर से हानियां (Limitations of Computer)

(1) असामाजिक कार्यों में वृद्धि

वर्तमान में कम्प्यूटर के बढ़ते प्रयोग से अनेक क्षेत्रों में अश्लील व असामाजिक कार्यों को बढ़ावा मिला है। कई बार कम्प्यूटर में अश्लील वायरस डाल दिए जाते हैं, सी. डी. पाइरेसी का कारोबार बढ़ा है। बाजार में अश्लील सी.डी. आने लगी हैं। इससे समाज में अश्लीलता और अनैतिक मूल्यों का प्रचलन बढ़ा है। इससे सामाजिक संस्कृति पर आक्रमण करना सहज हो गया है। कम्प्यूटर ने आर्थिक जगत् में धोखाधड़ी के नये-नये आयाम खोल दिए हैं।

(2) अत्यधिक निर्भरता

आज का मानव कम्प्यूटर पर अत्यधिक निर्भर हो गया है। छोटे-छोटे बालक साधारण जोड़, घटाना, गुणा आदि के लिए कैलकुलेटर का सहारा लेते हैं जिससे उनकी मानसिक क्षमता में वृद्धि नहीं हो पाती। इसी प्रकार मौसम विज्ञानी, ज्योतिषी, वैज्ञानिक आदि कम्प्यूटरों पर निर्भर हो गये हैं। वे मानसिक अभ्यास व परिश्रम से कार्य नहीं करना चाहते। ज्योतिषी एक-दो बटन दबाकर सम्पूर्ण कुण्डली तैयार कर लेते हैं। वर्षों के अनुभव पर आधारित प्राचीन विशेषज्ञों के निष्कर्षों को आज हम केवल कम्प्यूटर के उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। कम्प्यूटर पर अब हर प्रकार का व्यक्ति सीमा से अधिक निर्भर कारण हो गया है।

(3) खर्चों में कमी

कम्प्यूटर ने मानव जीवन को अत्यधिक खर्चीला बना दिया है। बड़े-बड़े आफिसों तथा सरकारी कार्यालयों में कम्प्यूटर अनावश्यक रूप से चलते रहते हैं। कुछ कार्यालयों में तो अपना प्रचार करने हेतु कुछ-न-कुछ सॉफ्टवेयरों पर कार्य चलता रहता है। इससे निश्चित ही विद्युत खर्चे में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अतिरिक्त सी.डी., फ्लॉपी, इंक आदि पर भी खर्च करने पड़ते हैं।

(4) बेरोजगारी में वृद्धि

कम्प्यूटर की कार्यक्षमता अत्यधिक है। थोड़े ही समय में अनेक व्यक्तियों का काम एक कम्प्यूटर सहज ही कर देता है। इससे बड़ी मात्रा में बेरोजगारी में वृद्धि हुई है, कम्प्यूटर में इंजीनियरिंग तथा इससे सम्बन्धित रोजगारों ने जितने रोजगार उपलब्ध कराये हैं, इससे कई गुना ज्यादा व्यक्ति बेरोजगार हुए हैं।

(5) बुद्धिमत्ता की कमी

कम्प्यूटर मशीन है। इसका कार्य प्रयोक्ता के निर्देशों को कार्यान्वित करना है। कम्प्यूटर किसी भी स्थिति में न ही निर्देशों से अधिक और न ही इससे कम क्रियान्वयन करता है।

(6) सामान्य बोध की कमी

कप्यूटर के अंदर सामान्य बोध नहीं होता है। आत्मरक्षा करने में अक्षम प्रत्येक कम्प्यूटर का नियन्त्रण मानव के पास ही होता है वह जिस प्रकार उसे नियन्त्रित करता है वह नियन्त्रित होता है। कम्प्यूटर किसी भी प्रकार आत्मरक्षा नहीं कर सकता है। कम्प्यूटर केवल पासवर्ड की जाँच करता है। यह दृष्टिकोण कम्प्यूटकर को एक ओर विश्वसनीय बताता है तो दूसरी ओर इसको विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न भी लगता है।

(7) अन्य हानियाँ-

(i) कम्प्यूटर में कोई वायरस आ जाये तो कई बार भ्रामक गणनाएँ तथा परिणाम देता है। हम उन्हें ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेते हैं। उनकी सत्यता की जाँच नहीं करते हैं। कम्प्यूटर पर अधिक निर्भरता के कारण कम्प्यूटर द्वारा की गयी त्रुटियों की जाँच की क्षमता भी व्यक्तियों में नहीं बची है।
(ii) विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता को कम्प्यूटर ने जन्म दिया है। कम्प्यूटर का प्रयोग हर व्यक्ति नहीं कर सकता है। इसके हजारों प्रयोग व सॉफ्टवेयर हैं। इससे अधिक विशिष्टीकरण को बढ़ावा मिलता है।


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