सामाजिक अध्ययन की शिक्षण सामग्री एवं प्रयोगशाला | CTET SOCIAL STUDIES PEDAGOGY

दोस्तों अगर आप CTET परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो CTET में 50% प्रश्न तो सम्मिलित विषय के शिक्षणशास्त्र से ही पूछे जाते हैं। आज हमारी वेबसाइट hindiamrit.com आपके लिए सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षणशास्त्र से सम्बंधित प्रमुख टॉपिक की श्रृंखला लेकर आई है। हमारा आज का टॉपिक सामाजिक अध्ययन की शिक्षण सामग्री एवं प्रयोगशाला | CTET SOCIAL STUDIES PEDAGOGY है।

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सामाजिक अध्ययन की शिक्षण सामग्री एवं प्रयोगशाला | CTET SOCIAL STUDIES PEDAGOGY

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सामाजिक अध्ययन की शिक्षण सहायक सामग्री/अनुदेशनात्मक सामग्री

सामाजिक विज्ञान शिक्षण में प्रयुक्त अनुदेशनात्मक सामग्री या शिक्षण साधनों से तात्पर्य ऐसी सामग्री और साधनों से है जिनके प्रयोग द्वारा एक अध्यापक को अपने अनुदेशन और शिक्षण कार्य को सफलतापूर्वक संपादित करके विषय शिक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में बहुत अधिक सहायता मिलती है। इसीलिए इन्हें प्राय: सहायक साधन का नाम भी दिया जाता है। दूसरी ओर क्योंकि यह सामग्री और साधन ऐसे होते हैं जिनके द्वारा सुनकर या देखकर ज्ञान प्राप्त किया जाता है अतः इन्हें दृश्य श्रव्य सहायक सामग्री या साधनों का नाम दिया जाता है।

अनुदेशनात्मक सामग्री की विशेषताएं

1• विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ज्ञान की प्राप्ति में सहायक
2• विषय-वस्तु की स्पष्टता
3• विषय को रोचक बनाने में सहायक
4• स्थायी एवं प्रभावपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति
5• शिक्षण के सामान्य सिद्धांतों तथा सूत्रों का उपयोग
6• समय एवं परिश्रम की बचत
7• कक्षा के वातावरण को सजीव एवं सक्रिय बनाना
8• प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने का सर्वोत्तम विकल्प
9• मानसिक शक्तियों के विकास में सहायक
10• अनुशासनहीनता की समस्या के हल में सहायक
11• नवीन शिक्षण विधियों तथा तकनीक के उचित प्रयोग में सहायक
12• सामाजिक विज्ञान के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक

अनुदेशनात्मक सामग्री का वर्गीकरण

(1) दृश्य साधन –इनकी दो प्रमुख श्रेणियां होती हैं-

(i) प्रक्षेपी साधन जैसे-स्लाइड, फिल्म पट्टी, एपिडायस्कोप, प्रोजेक्टर आदि।
(ii) अप्रक्षेपी साधन जैसे-श्यामपट, चार्ट, चित्र, अखबार, मॉडल, नमूने आदि।

(2) श्रव्य साधन-जैसे-रेडियो, टेपरिकॉर्डर आदि।

(3) दृश्य-श्रव्य साधन-जैसे-टेलीविजन, वीडियो, शिक्षण मशीन आदि।

(4) क्रियात्मक साधन-जैसे-कवि सम्मेलन, नाटक, संग्रहालय, पर्यटन तथा मेले आदि का आयोजन।

अनुदेशनात्मक सामग्री के उपयोग हेतु सावधानियां

सामग्री एवं साधनों का चयन शिक्षण कार्य की प्रकृति और उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए समझदारी से किया जाना चाहिए।
शिक्षण साधनों के प्रयोग से संबंधित सभी प्रकार की तैयारियां पहले ही कर लेनी चाहिए। शिक्षण साधनों का प्रयोग करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इनके उपयोग से शिक्षण-अधिगम के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावपूर्ण ढंग से हो रही हो। शिक्षण साधनों के प्रदर्शन के पश्चात अनुवर्ती कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की शैक्षणिक कमी या अधूरेपन को पूरा किया जा सके।

सामाजिक अध्ययन की प्रयोगशाला

अर्थ: सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला से अभिप्राय विद्यालय में स्थित उस कक्षा से है, जिसमें सामाजिक अध्ययन विषय से संबंधित सहायक सामग्री, उपकरणों को व्यवस्थित ढंग से रखा गया हो। जहां विद्यार्थियों द्वारा उपकरणों तथा सहायक सामग्री को प्रयोग में लाया जा सके।

शिक्षण सहायक सामग्री एवं स्रोत

वैज्ले के अनुसार-“जिस कक्षा में सामाजिक अध्ययन के लिए आवश्यक दृश्य तथा श्रव्य सामग्री रखी होती है, वह सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला कहलाती है।”

सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला का महत्व

1• उचित वातावरण प्रदान करने में सहायक
2• समय तथा ऊर्जा की बचत
3• सामग्री को सुरक्षित रखने में सहायक
4• विचारगोष्ठी, वाद-विवाद इत्यादि का आयोजन करने में सहायक
5• शिक्षण तथा अधिगम को प्रभावशाली बनाने में सहायक
6• कार्यात्मक वातावरण प्रदान करने में सहायक
7• विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करने में सहायक

सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला की सामग्री

1• विद्यार्थियों के बैठने के लिए स्थान
2• मेज
3• चाकबोर्ड
4• बुलेटिन बोर्ड
5• मानचित्र
6• चित्र तथा चार्ट
7• प्रतिमान
8• ग्लोब
9• वस्तु संग्रहालय
10• पुस्तकें

मानचित्र

सामाजिक अध्ययन शिक्षण के लिए मानचित्र का बहुत अधिक महत्व है। इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और वर्तमान सामाजिक जीवन से संबंधित बहुत सी घटनाओं, योजनाओं, स्थानों आदि के बारे में बताने में मानचित्र महत्वपूर्ण है। मानचित्र का उपयोग किसी भी वस्तु, दिशा अथवा स्थान की पृथ्वी पर वास्तविक स्थिति बताने के लिए किया जाता है। मानचित्रों में चिह्नों (प्रतीकों) का प्रयोग किया जाता है जिन्हें रुदि चिन्ह कहते हैं। इन्हें चिह्नों की भाषा सर्वव्यापी होती है।

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मानचित्र के अनुसार मुख्यतः मानचित्र पांच प्रकार के होते हैं।

1. भौतिक मानचित्र-ये मानचित्र जलवायु, वर्षा, मिट्टी, संसाधन आदि को प्रदर्शित करते हैं।
2. राजनीतिक मानचित्र- ये शहरों, प्रान्तों, राज्यों तथा देशों के क्षेत्र विभाजन को प्रदर्शित करते हैं।
3. आर्थिक मानचित्र-ये मानचित्र व्यापार फसलें, रेल, सड़कों आदि को प्रदर्शित करते हैं।
4. सामाजिक मानचित्र-इन मानचित्रों में जनसंख्या वितरण, भाषा, विज्ञान राज्यों में साक्षरता दर आदि को दिखाया जाता है।
5. ऐतिहासिक मानचित्र-ये मानचित्र प्राचीन शासकों की राज्य सीमाओं को दर्शाते हैं।

चार्ट

Chart चार्ट एक साधारण समतल चित्रयुक्त प्रदर्शन सामग्री है। चार्ट का प्रयोग प्रायः रेखाचित्र बनाने में, किसी नियम, शहर, समाज विभिन्न देशों, घटनाओं, व्यक्तियों के कालक्रम, संख्यात्मक गुणात्मक सूचनाएं,तथ्यों, आंकड़ों के रूप में छात्रों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इसके माध्यम से विस्तृत सामग्री को संक्षिप्त करके स्पष्ट रूप से समझा और जाना जा सकता है।

चार्ट के प्रकार

1. विकास चार्ट :- यह चार्ट किसी भी साम्राज्य के विकास तथा पतन को दर्शाता है।
2. समय चार्ट :- यह अतीत में घटी घटनाओं के बाल तथा तिथि को दर्शाता है इसे कालक्रम चार्ट भी कहते हैं।
3. फलोचार्ट :- फलोचार्ट अथवा प्रवाह चार्ट संगठनात्मक तत्वों तथा क्रियात्मक सम्बन्धों को प्रदर्शित करता है।
4. चित्रचार्ट :- इन चाटों में पढ़ाई जाने वाली विषय-वस्तु को आलेख चित्रों, कृतियों, ग्राफ-रेखा, शब्दों के माध्यम से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाता है। कक्षा-कक्ष में शिक्षण के समय सबसे ज्यादा इसी चार्ट का प्रयोग होता है।
5. वर्गीकृत चार्ट :- इन चार्टों का प्रयोग किसी भी तथ्य, संगठन, सरकार की प्रक्रिया इत्यादि का वर्गीकरण प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
6. तुलनात्मक चार्ट :- इन चार्टी का प्रयोग विभिन्न राज्यों अथवा देशों में तुलनात्मक विषय को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

ग्लोब

ग्लोब एक प्रकार से पृथ्वी के वास्तविक स्वरूप को प्रदर्शित करने वाले ऐसे मॉडल या प्रतिरूप हैं जिनसे यह पता चलता है कि पृथ्वी का आकार नारंगी की भांति गोल है सपाट या चपटा नहीं, यह स्थिर न रहकर अपनी धुरी पर घूमती रहती है, पृथ्वी का धरातल ऊंचा-नीचा है जिस पर भूमि कम और जल अधिक है; इसके अतिरिक्त विभिन्न भौगोलिक तथ्यों जैसे अक्षांश एवं देशांतर रेखाएं, कर्क, मकर तथा विषुवत् रेखाएं, स्थानीय, देशीय व अन्तर्राष्ट्रीय समय एवं स्थानों की तुलनात्मक दूरी आदि की सही जानकारी हेतु ग्लोब का उपयोग ही सर्वोत्तम है।
ग्लोब के प्रकार
1. भौतिक ग्लोब
2. राजनीतिक ग्लोब
3. भौतिक तथा राजनीतिक ग्लोब
4. खाका ग्लोब

ग्राफ/आरेख

सामाजिक विज्ञान के शिक्षण में चित्रात्मक दृश्य सामग्री के रूप में ग्राफों का प्रयोग अधिकतर एकत्रित सूचनाओं सर्वेक्षण परिणामों और संख्यात्मक या गुणात्मक आंकड़ों आदि को ठीक प्रकार प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। प्रायः इस कार्य के लिए सामाजिक विज्ञान में निम्न प्रकार के ग्राफ काम में लाए जाते हैं-
1. रेखा ग्राफ-सरल रेखाओं के माध्यम से आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण
2. दंड ग्राफ-दंडों या छड़ों के प्रयोग द्वारा आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण ।
3. वृत्त ग्राफ-वृत्त खंडों के माध्यम से आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण।
4. चित्रात्मक ग्राफ-चित्रों के माध्यम से आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण ।

सामाजिक विज्ञान में क्षेत्र भ्रमण

क्षेत्र भ्रमण अथवा भौगोलिक यात्राओं से तात्पर्य उन शिक्षण क्रियाओं से होता है जोकि कक्षा शिक्षण में न करके उनका अध्ययन बाहर उनके प्राकृतिक वातावरण एवं स्थान पर जाकर ही अध्यापक द्वारा कराया जाता है। इससे छात्रों में भूगोल सम्बन्धी ज्ञान को अधिक विस्तृत किया जा सकता है। इन्हें ही भौगोलिक यात्रायें कहते हैं। इन्हें अन्य नामों से भी पुकारा जाता है जैसे-
1• क्षेत्र भ्रमण (Field Excurison)
2• क्षेत्रीय पर्यटन (Field Trips)
3• स्कूल पर्यटन (School Journes)
4• स्कूल भ्रमण (School Picnic)

क्षेत्रीय भ्रमण के लाभ

1• छात्रों में सामूहिक रूप से रहने की आदत का विकास।
2• स्वतः ज्ञान प्राप्त होने से उत्तरदायित्व की भावना का विकास।
3• पर्यटन के द्वारा शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार का समन्वित विकास
4• पर्यटन द्वारा एक दूसरे के सम्पर्क में आने पर छात्रों की झिझक शर्मालापन आदि अवगुणों में सुधार।
5• छात्रों में चिन्तन व तर्कशक्ति का विकास।
6• छात्रों में सामूहिक अनुशासन, संगठन एवं नेतृत्व आदि गुणों का विकास
7• भ्रमण द्वारा देश की धरातलीय बनावट, जलाशयों, वनस्पति, जीव-जन्तु मानव जीवन आदि के ज्ञान में अभिवृद्धि।
8• पर्यटन द्वारा विविध प्रकार की भाषा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, संस्कृति आदि के ज्ञान की प्राप्ति।
9• पर्यटन द्वारा वास्तविक रूप में ज्ञान प्राप्त होता है जैसे-पर्वत, ढाल, झरने, घाटियां आदि का ज्ञान देखने पर ही सही प्राप्त होता है।
10• UNESCO के अनुसार पर्यटन का महत्व वस्तुओं, स्थलों आदि के प्रत्यक्ष निरीक्षण के साथ-साथ उनको स्वस्थ रुचि उत्पन्न कराना भी है।

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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के स्त्रोत

ऐसी वस्तुएं, स्थान आदि जो ज्ञान को वास्तविक आधार प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं, स्त्रोत कहलाते हैं। उदाहरण-स्वरूप, यदि सिन्धु घाटी सभ्यता का अध्ययन कर रहे हो तो इसके स्थल से प्राप्त सामग्री इस सभ्यता से सम्बन्धित हमारे ज्ञान को प्रमुख आधार प्रदान करेंगे और इन्हीं वस्तुओं के आधार पर हम इस सभ्यता के बारे में कुछ अनुमान लगा सकते हैं। इस प्रकार के स्थल ही स्त्रोत कहते जाते हैं।

सामाजिक अध्ययन के शिक्षण की उपयोगिता / महत्व

1• शिक्षण प्रक्रिया में प्रत्यक्ष अनुभव का अत्यधिक महत्व है।
2• स्त्रोत का प्रत्यक्ष प्रयोग शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को अधिक सरल एवं रुचिकर बना देता है।
3• स्त्रोत प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के साधन होते हैं।
4• किसी अन्य व्यक्ति या पुस्तक के द्वारा बताए गए अनुभवों की अपेक्षा स्वयं प्राप्त किया गया अनुभव अधिक लाभप्रद एवं महत्वपूर्ण होता है।

सामाजिक अध्ययन के स्त्रोतों के प्रकार

1. प्राथमिक स्त्रोत : ऐसे स्त्रोत जो अपने मूल रूप में पाए जाते हैं प्राथमिक स्त्रोत अथवा मूल स्त्रोत कहलाते हैं। ये हैं-भौतिक स्त्रोत-जैसे-अस्त्र-शस्त्र, मूर्ति, स्तम्भ स्मारक आदि। मौखिक स्त्रोत-दन्त कथाएं, कहानियां, परम्पराएं आदि एवं लिखित स्त्रोत-प्राचीन ग्रन्थ, डायरी, हस्तलिपियां आदि।
2. द्वितीयक स्त्रोत : ऐसे सभी स्त्रोत जो प्राथमिक स्त्रोतों की व्याख्यान तथा विश्लेषण करते हैं। द्वितीयक स्त्रोत प्राथमिक स्त्रोतों का चित्रात्मक और ग्रामीण वर्णन करते हैं। इसके उदाहरण हैं-विश्वकोष, आत्मकथाएं, पाठ्य-पुस्तकें आदि।

सामाजिक अध्ययन के स्त्रोतों के गुण

1• इनके द्वारा छात्रों में प्रामाणिक बातों को पहचानने की क्षमता विकसित की जाती है।
2• यह छात्रों को परीक्षा, तुलना या विश्लेषण करने का प्रशिक्षण प्रदान करता है। इसके द्वारा छात्रों में प्रमाणों पर आधारित तथ्यों को ग्रहण करने की आदत का विकास किया जाता है।
3• इसके द्वारा छात्रों की मानसिक शक्तियों का विकास किया जाता है।
4• स्त्रोत पाठ्य-पुस्तकों की विषय-वस्तु समृद्ध बनाने में सहायक होते हैं।
5• यह छात्रों में वास्तविकता को पहचानने की शक्ति प्रदान करता है।

सामाजिक अध्ययन के स्त्रोतों के दोष

1• इस विधि का प्रयोग छोटी कक्षाओं में नहीं किया जा सकता।
2• इस विधि के प्रयोग में सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि ऐसे स्त्रोत, पुस्तकों का अभाव है, जिनमें सभी स्त्रोतों का संकलन हो और वे माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए उपयुक्त हो।
3• विभिन्न स्त्रोत विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध है।

अभ्यास प्रश्न (बहुविकल्पीय प्रश्न ) –

1. नीचे दिए गए कथनों में से कौन सा एक कथन सामाजिक अध्ययन शिक्षण संबंधी अनुदेशनात्मक सामग्री के महत्व से संबंधित नहीं है?
(a) इससे शिक्षार्थियों में केवल श्रवण एवं अवलोकन कौशलों का विकास होता है।
(b) इनके प्रयोग से प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने के सर्वोत्तम विकल्प प्राप्त होते हैं।
(c) अनुदेशनात्मक सामग्री द्वारा शिक्षार्थियों को विषय वस्तु की स्पष्टता का उचित ज्ञान प्राप्त होता है।
(d) इनके उपयोग से विद्यार्थी अधिगम की प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेकर विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों द्वारा स्थायी ज्ञान प्राप्त करते हैं।

2. निम्न दी गई अनुदेशनात्मक सामग्रियों में से कौन सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला से संबंधित नहीं है? (a) प्रतिमान
(b) पुस्तकें
(c) चॉकबोर्ड
(d) राज्य

3.आप कक्षा VII में विद्यार्थियों को ‘प्राकृतिक संसाधन’ पढ़ा रहे हैं। आप विद्यार्थियों को प्रभावी तरीके से अवधारणा समझाने के लिए निम्नलिखित में से किस मानचित्र का उपयोग करेंगे?
a. भौतिक मानचित्र
b. आर्थिक मानचित्र
c. सामाजिक मानचित्र
d. ऐतिहासिक मानचित्र

4.सामाजिक विज्ञान शिक्षण के दौरान कक्षा VIII की शिक्षिका अपनी कक्षा के विद्यार्थियों को ‘समाचार पत्र से मौसम की रिपोर्ट संबंधी लगातार पिछले पांच दिनों की रिपोर्ट एकत्र करना एवं उन्हें अपनी नोट बुक में चिपकाने का कार्य सौंपती है उपरोक्त गतिविधि के द्वारा वह-
(a) मौसम के तत्वों/संकेतों के चित्र एकत्रित करवाना चाहती है।
(b) ‘मौसम और जलवायु’ की संकल्पना संबंधी अवधारणा को स्पष्ट करना चाहती है।
(c) मौसम के तत्वों पर आधारित वर्कशीट बनाना चाहती है।
(d) बच्चों/शिक्षार्थीयों को व्यस्त रखना चाहती है।

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5. यदि आप कक्षा में विभिन्न महाद्वीपों की स्थिति दर्शाने के लिए ग्लोब का प्रयोग करते हैं तो यह शिक्षण सामग्री कहलाएगी-
a. श्रव्य
b. दृश्य
c. दृश्य-श्रव्य
d. उपरोक्त सभी

6. सामाजिक अध्ययन शिक्षण की प्रक्रिया के दौरान कक्षा में एक अध्यापिका चित्र, मानचित्र, ग्राफ, मॉडल आदि अनुदेशनात्मक सामग्री का प्रयोग करती है ये शिक्षण सहायक सामग्री हैं-
a. दृश्य
b. श्रव्य
c. चित्रात्मक
d. क्रियात्मक

7. सामाजिक अध्ययन विषय संबंधी कौशलों में मानचित्र पढ़ने के लिए आवश्यक है-
a. स्थान, दूरी और दिशाओं की सापेक्ष स्थिति को समझने की योग्यता
b. अभिव्यक्तात्मक योग्यताओं को बाहर निकालने के लिए विलक्षण सम्प्रेषण कौशल
c. ड्राइंग और पेंटिग्स संबंधी अवधारणा का उचित कौशल
d. मानचित्र पर स्थिति दर्शाने के लिए गणनाओं संबंधी उपयौगिक योग्यता

8.कक्षा VIII की शिक्षिका अपनी कक्षा के शिक्षार्थियों को ‘महासागरों’ संबंधी विषय की अवधारणा को स्पष्ट करने हेतु किस प्रकार के मानचित्रों का उपयोग करेगी-
(a) भौगोलिक मानचित्र
(b) राजनैतिक मानचित्र
(c) पृथ्वी का पोस्टर
(d) सामाजिक मानचित्र

9.मान लीजिए कि आप दोपहर के भोजन अवकाश के बाद सामाजिक अध्ययन शिक्षण के दौरान पाती है कि कक्षा के बच्चे/विद्यार्थी पाठ में रुचि नहीं ले रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगी?

(a) पाठ को रोचक बनाने हेतु बहु-आयामी अनुदेशनात्मक सामग्री का उपयोग करेंगी ।
(b) शिक्षार्थीयों को डांटकर कक्षा में सक्रिय रहने हेतु विवश करेंगी
(c) पाठ को बीच में ही रोककर बच्चों के मनोरंजन हेतु उन्हें कोई कहानी अथवा चुटकला सुनाएंगी।
(d) सभी बच्चों को कक्षा से बाहर ले जाकर कुछ समय उन्हें खेलने देंगी ताकि वो बाद में पाठ में रुचि ले सके।

10. सामाजिक अध्ययन की एक शिक्षिका अपनी कक्षा के विद्यार्थियों को क्षेत्र भ्रमण के दौरान ‘कुतुबमीनार’ दिखाने के लिए लेकर जाती है, अतः इस प्रमण हेतु शिक्षिका का उद्देश्य होगा-

(a) कुतुबमिनार दिखाने के दौरान बच्चों/शिक्षार्थीयों में अन्य ऐतिहासिक इमारतों से तुलना करने की क्षमता का विकास करना।
(b) क्षेत्र भ्रमण पर ले जाकर बच्चों का मनोरंजन करना
(c) कुतुबमिनार के निर्माण एवं इतिहास संबंधी जानकारी का बोध विद्यार्थियों को कराना
(d) उपरोक्त सभी

11. निम्नलिखित में से कौन-सा स्त्रोत विधि का लाभ है।
(a) छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं है।
(b) यथार्थ रूप से उपयोगी स्त्रोतों का अभाव होता है।
(c) विद्यार्थी बोर एवं भ्रमित हो जाते हैं।
(d) विद्यार्थी सक्रिय रहते हैं।

12. शिक्षार्थियों को ‘दिन व रात’ संबंधी अवधारणा पढ़ाने के लिए आप किस प्रकार की अनुदेशनात्मक
सामग्री का प्रयोग करेंगी?

(a) ग्लोब
(b) मानचित्र
(c) चार्ट
(d) श्यामपट्ट

13. स्त्रोत-
(a) ऐसी वस्तुएं, स्थान आदि जो ज्ञान को वास्तविक आधार प्रदान करते हैं।
(b) ऐसी वस्तुएं जो पाठ को रोचक बनाते हैं।
(c) ऐसी वस्तुएं जो पाठ को जल्दी एवं कम समय में खत्म करने में सहायक हैं।
(d) ऐसी वस्तुएं जो अध्यापक को कार्य को सरल बनाती हैं।

14. सामाजिक अध्ययन की शिक्षिका अपनी कक्षा के अध्यापकों को म्यूजियम/संग्रहालय ले जाकर विभिन्न वस्तुओं जैसे- अस्त्र-शस्त्र / मूर्तियां आदि से अवगत कराती हैं इस प्रकार वह-
(a) विद्यार्थियों को स्त्रोतों का प्रत्यक्ष अनुभव करा रही हैं जो स्थायी एवं लाभप्रद है।
(b) विद्यार्थियों को संग्रहालय में घूमाकर उनकी नजरों में महान् बनना चाहती है।
(c) ऐसा करके अध्यापिका खुद भी संग्रहालय घूमना चाहती थी।
(d) विद्यार्थियों को संग्रहालय देखना अच्छा लगता है इसलिए शिक्षिका उन्हें ले गई।

15. “जिस कक्षा में सामाजिक अध्ययन के लिए आवश्यक दृश्य तथा श्रव्य सामग्री रखी होती है, वह सामाजिक अध्ययन प्रयोगशाला कहलाती है। यह कथन है-
(a) वैस्ले
(b) जेम्स हामिंग
(c) बाइनिंग व बाइनिंग
(d) यू.एस.ए. परिषद

उत्तरमाला

1. (a)          2. (d)           3. (a)         4. (b)               5. (a)            6. (a)            7. (a)         8. (a)                 9. (a)           10. (a)          11. (d)      12. (a)
13. (a)         14. (a)        15. (a)

                             ◆◆◆ निवेदन ◆◆◆

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